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उद्गार
 श्रीरमन
मूल्य रू 25/- (डाक व्यय अतिरिक्त)
17 जुलाई, 2004साहित्यकार श्री के. के. विद्यार्थी सम्मानि..

लखनऊ, 9 जुलाई, अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रशिक्षण महाविद्यालय समिति के तत्वावधान में 3/17, विश्वास खण्ड गोमती नगर में अवकाश प्राप्त आई. ए. एस.  डॉ. परमानन्द मिश्र  की अध्यक्षता तथा डॉ. तुकाराम वर्मा के कुशल संचालन में पटना से पधारे प्रख्यात साहित्यकार श्री के. के. विद्यार्थी के सम्मान में एक  काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी जिसका शुभारम्भ श्री राम हर्ष यादव 'हर्ष' की वाणी वन्दना से हुआ | उन्होने मानवता को कलंकित करने वाले अराजक तत्वों की ओर समाज का ध्यान आकर्षित करते हुए व्यंग्य किया  -

" छीन लेते हैं रोटियाँ मुँह की,
इससे अच्छा तो भेडिये होते || "
समाज मे साम्प्रदायिकता का विष घोलने वालो को नेक सलाह देते हुए कविवर  श्री वी. पी. शाक्य ने कहा कि -
" पूर्वजो की खातिर खून पानी की तरह बहाने से क्या होगा ? 
उनसे बेहतर कुछ कर के दिखाएँ तो कोई बात बने "
दोहाकार श्री शशि प्रकाश तिवारी ने कोमल कांत श्रृंगारिक दोहों के माध्यम से वातावरण  को रसमय बनाया | यथा -
" बंजारों सा घूमता, इत-उत बरसे मेह |
सोन मछरिया तड़पती, प्यासी- प्यासी देह ||"
कुंडलियाकार श्री राम औतार "पंकज" ने राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता के मह्त्व को प्रतिपादित करते हुए आपसी भाईचारे पर बल दिया -
" कह पंकज कर भेद , व्यक्ति में व्यक्ति न छॉटों |
रख समता का भाव प्यार जन-जन में बांटो ||"
प्रसिद्ध रचनाकार डॉ. तुकाराम वर्मा ने काव्य एवं कवि धर्म की सारगर्भित विवेचना प्रस्तुत करते हुए सम्मति व्यक्त की कि 
" काव्य  की फुहार के प्रसार से सदैव, सावन समान जेठ मास को बनाता हूँ | "
हास्य व्यंग्यकार डण्डा लखनवी ने हास्य व्यंग्य रचनाओं के अतरिक्त एक आत्मनिष्ठ गीत मे कहा कि -
" पीड़ा पा कर कभी न चीखा , मैने यूं गलना ही सीखा |
नयी पौध हित बीज तजे तन जैसे गल-गल के ||"
सम्मानित अतिथि पूर्व आई. ए. एस . कविश्री के. के. विद्यार्थी ने अंग्रेजी भाषा में " उर्वशी" महाकाव्य का पद्यानुवाद तथा हिन्दी-उर्दू दोनो भाषाओं मे ललित रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को महिमा मंडित बना दिया | इंसानियत को कलंकित करने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होने अपनी सम्मति रखी कि -
" हे ताज-ओ- तख्त के दीवानो, तुम उस मस्ती को क्या जानो,
सब छोड़ के सब मिल जाता है , जब उसकी इनायत होती है | "
गोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. परमान्नद मिश्र  ने अपने अध्यक्षीय भाषण मे काव्य के प्रयोजन और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला | अंत मे गोष्ठी के संयोजक एवं समाजसेवी श्री राम समुझ वर्मा ने पधारे हुए महानुभावों के प्रति आभार व्यक्त किया |


राष्ट्रीय समाचार

2004-03-22  अंकुर मिश्र फाउंडेशन पुरस्कार 
2004-04-12  लेखकों के लिए वित्तीय सहायता एवं पुरस्कार 
2004-06-18  अनुवादकों का सूचीकरण 
2004-07-17  साहित्यकार श्री के. के. विद्यार्थी सम्मानि.. 
अन्तर्राष्ट्रीय समाचार

समुद्र मंथन
 सतीश कुमार
मूल्य रू 40/- (डाक व्यय अतिरिक्त)

बडे वही इंसान
डण्डा लखनवी
मूल्य रू 50/- (डाक व्यय अतिरिक्त)

आह्वान
डॉ0  कैलाश निगम
मूल्य रू 75/- (डाक व्यय अतिरिक्त)


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